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Thursday, 9 August 2018

SC/ST एक्ट के खिलाफ भारत बंद प्रभावशाली, बिहार में सड़क और रेल सेवा बाधित

PATNA : सवर्ण एकता जिंदाबाद, नीतीश कुमार मुर्दाबाद, पीएम मोदी मुर्दाबाद…आरक्षण विरोधी लोग दरभंगा स्टेशन पर नारेबाजी कर रहे हैं। संपर्क क्रांति की इंजन पर कुछ लोग भगवा झंडा लेकर चढ गए हैं। कुछ लोग पटरी पर बैठे हुए हैं। इस कारण 8.30 में खुलने वाली ट्रेन 11.30 बजे तक स्टेशन पर खड़ी है।



क्या दरभंगा, क्या गोपालगंज, क्या समस्तीपुर और क्या पटना। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी इस आरक्षण को लेकर लोगों में आक्रोश देखा जा रहा है। इस बंद के दौरान कहीं पर बंद समर्थकों का उग्र रूप देखा जा रहा है तो कहीं पर बंद समर्थकों का मानवीय चेहरा भी नजर आ रहा है। जगह जगह जाम में फंसे लोगों को पानी भी पिलाया जा रहा है। गोपालगंज जिला के यादवपुर चौक पर बन्द समर्थकों ने  एम्बुलेंस को रास्ता दिया
बताया जा रहा है कि राजधानी पटना सहित बिहार के 25 जिलों में आरक्षण विरोध को लेकर आरक्षण न्याय आंदोलन सहित विभिन्न संगठन ने आज बिहार बंद किया है। राजधानी पटना के डाकबंगला चौक, राजेंद्र नगर रेलवे स्टेशन, महात्मा गांधी सेतु सहित कई जगहों पर बंद समर्थक द्वारा आवागमन को प्रभावित किया गया। उधर दरभंगा में नई दिल्ली जाने वाली संपर्क क्रांति ट्रेन को दरभंगा में रोक कर विरोध प्रदर्शन किया गया। बेला, दोनार, रेलवे स्टेशन पर वाहन नहीं चलने दिए गए। जिस कारण यात्रियों को परेशानियों का सामना करना पड़ा है।

बताते चले कि एक बार फिर से आरक्षण को लेकर देश में सरकार के खिलाफ सवर्ण संगठनों ने आंदोलन का आह्वान कर दिया है। आज गुरुवार को एससी एसटी एक्ट के लिए केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरुद्ध अध्यादेश लाने के विरोध में भारत बन्द किया गया है। इस बाबत बिहार के कई जिलों में सवर्ण संगठनों ने बुधवार को जगह-जगह बाइक रैली निकलकर लोगों को भारत बंद में भाग लेने के लिए आह्वान किया। इस बाबत जानकारी देते हुए आरक्षण न्याय आंदोलन के आंदोलन प्रभारी बाल्मीकि कुमार ने कहा कि केंद्र हो या राज्य सरकार सभी सर्वणों को छलने का काम करती रही है। सरकार बदलती है लेकिन स्थितियां वही की वही रह जाती है।

जब उनसे भारत बंद को लेकर विभिन्न राजनितिक दलों में मौजूद सवर्ण नेताओं से मिलने वाले समर्थन को लेकर सवाल पूछा गया तो बाल्मीकि कुमार ने सवर्ण नेताओं को निशाने पर लेते हुए कहा कि सवर्ण का कोई नेता नहीं है जो भी हैं वह जाति के नाम पर चुनाव के समय लोगों को भावना में बांधकर अपना काम निकाल लेते हैं लेकिन जब सवर्णों के लिए आवाज उठाने की बारी आती है तब कोई भी बोलने के लिए भी तैयार नहीं होते हैं।


वहीं एससी एसटी अधिनियम को लेकर किसी मामले में क़ानूनी कारवाई के तौर पर गिरफ़्तारी के प्रावधान पर उन्होंने राज्य सरकार को निशाने लेते हुए कहा कि ताजा मामला ही देख लिया जाय तो राज्य के मुख्यमंत्री लगतार सवर्ण विरोधी एक्ट बनाकर आम सवर्णों के लिए इतना भेदभाव वाला कानून क्यों ? सोचने की बात है। सरकार आरक्षण के नाम पर सिर्फ छलने का काम कर रही है।


वहीं बाल्मीकि कुमार ने कहा कि
इससे पहले एसएसी/एसटी एक्ट में संसोधन की संभावनाओ को देखते हुए दलित संगठनों के अप्रैल महीने में किये गये भारत बंद में कई जगहों से हिंसा की खबर सामने आई थी। इसका असर बिहार के विभिन्न हिस्सों में भी देखने को मिला था। बंद कर रहे आंदोलनकारियों ने कई जगह ट्रेन रोकी, तो कई जगहों पर बाजार बंद करवाकर जमकर बवाल काटा था। अब देखना होगा कि सवर्ण संगठनों के सफल भारत बंद का असर किस तरह देखा जाता है।











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